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इंदौर में अवैध शराब कारोबार पर आबकारी विभाग का बड़ा शिकंजा, 34 प्रकरण दर्ज; 320 लीटर मदिरा जब्त

Sundar singh hada , इंदौर

· अपडेट: 05 नवम्बर, 11:06 रात

10 मिनट 34

देवास में टीआई दिलीप पुरी की हत्या ने खोली शराब तस्करी के नेटवर्क की परतें, आखिर कब टूटेगा अवैध कारोबारियों का सिंडिकेट? प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

इंदौर/देवास, मध्यप्रदेश।

मध्यप्रदेश में अवैध शराब का कारोबार अब केवल कानून व्यवस्था से जुड़ी सामान्य समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस, आबकारी विभाग और प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ लगातार कार्रवाई के दावों के बीच देवास जिले में एक थाना प्रभारी की जान चले जाना इस पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

एक तरफ इंदौर में आबकारी विभाग ने विशेष अभियान चलाकर ढाबों, रेस्टोरेंटों, प्रमुख मार्गों और शहर के प्रवेश बिंदुओं पर सघन चेकिंग करते हुए 34 प्रकरण दर्ज किए हैं, वहीं दूसरी तरफ देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब से भरे ट्रक को रोकने की कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।

यह घटना केवल एक पुलिस अधिकारी की मृत्यु का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है कि आखिर अवैध शराब का कारोबार किन परिस्थितियों में इतना संगठित और बेखौफ हो गया कि उसे रोकने पहुंचे पुलिस अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी?

इंदौर में आबकारी विभाग की स्पेशल ड्राइव, तीन दर्जन से अधिक प्रकरण

इंदौर संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार द्वारा अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद इंदौर आबकारी विभाग ने विशेष अभियान के तहत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कार्रवाई तेज की।

अभियान के दौरान पीथमपुर टोल, मांगलिया टोल और बेटमा टोल पर विशेष नाकाबंदी कर वाहनों की सघन जांच की गई। इसके अतिरिक्त रिंग रोड और बायपास क्षेत्र में संचालित ढाबों एवं अन्य प्रतिष्ठानों पर भी निरीक्षण किया गया।

कार्रवाई के दौरान आबकारी विभाग ने कुल 34 प्रकरण दर्ज किए। विभागीय कार्रवाई में लगभग 320 लीटर अवैध मदिरा और एक दोपहिया वाहन जब्त किया गया। जब्त सामग्री एवं वाहन की अनुमानित कीमत 2.50 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।

अभियान के दौरान महू तहसील के सिमरोल क्षेत्र के ग्राम जगजीवन में एक मकान पर दबिश दी गई। यहां से विभिन्न ब्रांड की आठ पेटी अवैध मदिरा बरामद हुई, जिसकी कुल मात्रा लगभग 78 बल्क लीटर बताई गई। इस मामले में आरोपी विनोद पिता राधेश्याम चौहान के विरुद्ध मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क) एवं 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

संभागायुक्त ने दिए जिला बदर और NSA तक की कार्रवाई के निर्देश

अवैध शराब कारोबार को लेकर प्रशासन ने अब और सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।

संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर निर्देश दिए कि अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण, परिवहन और विक्रय में संलिप्त व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने जरूरत के अनुसार अवैध शराब कारोबारियों के विरुद्ध जिला बदर और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में आईजी अनुराग, इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा, उपायुक्त आबकारी इंदरसिंह जामोद सहित संभाग के विभिन्न जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

संभागायुक्त ने यह भी निर्देशित किया कि संवेदनशील क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों, प्रमुख मार्गों और अवैध शराब परिवहन की आशंका वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए। शराब दुकानों के निर्धारित समय के बाद संचालन की शिकायतों पर भी कार्रवाई की जाए।

आंकड़े चौंकाने वाले: एक वित्तीय वर्ष में 32,190 आबकारी प्रकरण

आबकारी विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में इंदौर संभाग में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत कुल 32,190 प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

इनमें धारा 34(1) के अंतर्गत 27,147 तथा धारा 34(2) के अंतर्गत 5,043 प्रकरण शामिल हैं।

ये आंकड़े बताते हैं कि संभाग में आबकारी कानून के उल्लंघन के मामले कितने बड़े स्तर पर सामने आ रहे हैं। हालांकि, केवल प्रकरणों की संख्या से अवैध कारोबार पर नियंत्रण का आकलन नहीं किया जा सकता। यह देखना भी जरूरी है कि कितने मामलों में वास्तविक कारोबारियों तक कार्रवाई पहुंची, कितनों को सजा मिली और कितने बड़े नेटवर्क ध्वस्त किए गए।

देवास में टीआई दिलीप पुरी की मौत: शराब तस्करी रोकने पहुंचे अधिकारी को ट्रक से कुचला

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और दुखद पहलू देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत है।

मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि हरदा के टिमरनी क्षेत्र से अवैध शराब से भरा वाहन इंदौर के रास्ते गुजरात की ओर जा रहा है। इस सूचना के बाद देवास पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में कई पुलिस टीमें गठित की गईं। कन्नौद, सतवास, नेमावर और खातेगांव क्षेत्र में वाहन को रोकने के लिए घेराबंदी और नाकाबंदी की गई।

इसी कार्रवाई के दौरान खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी पुलिस टीम के साथ वाहन को रोकने पहुंचे। आरोप है कि वाहन चालक ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए ट्रक आगे बढ़ा दिया और थाना प्रभारी को कुचल दिया।

गंभीर रूप से घायल दिलीप पुरी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

ड्यूटी के दौरान एक पुलिस अधिकारी की इस तरह मौत ने पुलिस विभाग के साथ-साथ पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया।

दिलीप पुरी का पार्थिव शरीर धार जिले स्थित उनके पैतृक गांव पहुंचने पर परिवार और ग्रामीणों का दर्द सामने आया। एक परिवार ने अपना बेटा, पति और पिता खो दिया, जबकि पुलिस विभाग ने अपने एक अधिकारी को खो दिया।

700 किलोमीटर तक फैले तस्करी नेटवर्क की जांच, कई आरोपी जांच के घेरे में

इस हत्याकांड के बाद जांच का दायरा केवल ट्रक चालक तक सीमित नहीं रहा। पुलिस अब शराब की खेप के स्रोत, वाहन की व्यवस्था, परिवहन मार्ग, कथित वित्तीय लेनदेन और पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

5 नवंबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच में हरदा से देवास, इंदौर होते हुए गुजरात तक फैले लगभग 700 किलोमीटर के कथित तस्करी नेटवर्क की जानकारी सामने आई है।

रिपोर्टों में ट्रक में लगभग 1,400 पेटियां शराब होने और तस्करी के लिए अलग-अलग स्तर पर वाहन एवं सूचना तंत्र का इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख किया गया है।

पुलिस जांच में कई लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की वास्तविक भूमिका और आपराधिक संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में मुख्य संदिग्धों सहित कई लोगों को गिरफ्तार अथवा हिरासत में लिया गया है। दो आरोपियों के पुलिस हिरासत से भागने के प्रयास के दौरान अलग-अलग मुठभेड़ों में घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

आबकारी विभाग पर भी गिरी गाज, अधिकारियों और कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई

टीआई दिलीप पुरी की मौत के बाद प्रशासन ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी जांच शुरू की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हरदा के टिमरनी क्षेत्र में पदस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमरसिंह बघेल सहित आबकारी कर्मचारियों को निलंबित किया गया। तीन शराब दुकानों के लाइसेंस भी निलंबित किए गए।

इसके बाद देवास जिले में भी आबकारी विभाग के तीन कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की खबर सामने आई। इस प्रकार 4 नवंबर तक इस मामले में छह आबकारी अधिकारी-कर्मचारियों के निलंबन की जानकारी प्रकाशित हुई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपे जाने की भी खबरें सामने आई हैं।

सबसे बड़ा सवाल: आखिर इतने बड़े स्तर पर कैसे चल रहा था अवैध शराब का कारोबार?

अब सवाल केवल 34 प्रकरण दर्ज करने या 320 लीटर शराब जब्त करने का नहीं है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अवैध शराब का कारोबार इतने बड़े स्तर पर संचालित हो रहा था, तो उसकी नियमित निगरानी क्यों नहीं हो सकी?

क्या संबंधित क्षेत्रों में आबकारी विभाग की नियमित जांच हो रही थी?

क्या लाइसेंसी शराब दुकानों से निकलने वाले स्टॉक, परिवहन परमिट और वास्तविक गंतव्य का नियमित मिलान किया जा रहा था?

क्या प्रमुख राजमार्गों और टोल नाकों पर वाहनों की जांच केवल विशेष अभियान तक सीमित है, या नियमित रूप से भी ऐसी निगरानी की जाती है?

क्या ढाबों और रेस्टोरेंटों में होने वाली गतिविधियों की जांच के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था है?

और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि क्या अवैध शराब के कारोबार से जुड़े छोटे स्तर के आरोपियों के साथ-साथ पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले आर्थिक और संगठित तंत्र तक कार्रवाई पहुंचेगी?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों और प्रशासन को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।

प्रशासन के सामने पांच बड़ी चुनौतियां

1. तस्करी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश: केवल ट्रक चालक और छोटे वाहनों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। शराब की आपूर्ति करने वाले, परिवहन की व्यवस्था करने वाले, वित्तीय लेनदेन करने वाले और अवैध बाजार तक शराब पहुंचाने वाले सभी स्तरों की जांच जरूरी है।

2. आबकारी विभाग की जवाबदेही तय हो: जिन क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध कारोबार की शिकायतें मिलती रही हैं, वहां पदस्थ अधिकारियों की निगरानी और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।

3. शराब दुकानों के स्टॉक और परिवहन की जांच: लाइसेंसी दुकानों से निकलने वाली प्रत्येक खेप के दस्तावेज, परमिट, स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक परिवहन की जांच की जानी चाहिए।

4. पुलिस और आबकारी विभाग का संयुक्त अभियान: केवल एक-दो दिन की स्पेशल ड्राइव से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। पुलिस, आबकारी, परिवहन और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें नियमित निगरानी करें।

5. पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो: अवैध शराब और अन्य संगठित अपराधों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा संसाधन, बेहतर संचार व्यवस्था और प्रभावी रणनीति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

टीआई दिलीप पुरी की मौत केवल एक परिवार की क्षति नहीं, व्यवस्था के लिए चेतावनी

एक पुलिस अधिकारी जब कानून की रक्षा करने के लिए अपनी ड्यूटी पर निकलता है, तो उसके पीछे भी एक परिवार होता है। उसकी पत्नी, बच्चे, माता-पिता और पूरा परिवार उसके सुरक्षित लौटने की उम्मीद करता है।

लेकिन दिलीप पुरी की मौत ने उस परिवार की दुनिया बदल दी।

ऐसे में यह आवश्यक है कि उनकी मौत की जांच केवल घटना को अंजाम देने वाले वाहन चालक तक सीमित न रहे, बल्कि उस पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच हो जिसके कारण अवैध शराब का इतना बड़ा परिवहन नेटवर्क संचालित हो रहा था।

यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, कारोबारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी बिना किसी दबाव के नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

सरकार और प्रशासन के लिए यह समय केवल सख्त बयान देने का नहीं, बल्कि ठोस परिणाम दिखाने का है।

अब जनता को कार्रवाई नहीं, परिणाम चाहिए

इंदौर में 34 प्रकरण दर्ज होना और 320 लीटर अवैध शराब जब्त होना विभागीय कार्रवाई का एक हिस्सा है। लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि अवैध शराब की आपूर्ति कहां से हो रही है, इसके पीछे कौन लोग हैं और इस कारोबार से जुड़े बड़े आर्थिक नेटवर्क पर कब प्रभावी कार्रवाई होगी।

देवास में टीआई दिलीप पुरी की मौत के बाद यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है। अब प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जांच पारदर्शी हो, दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले और भविष्य में किसी अन्य पुलिसकर्मी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

क्योंकि कानून का राज केवल कार्रवाई के आंकड़ों से नहीं, बल्कि अपराध पर वास्तविक नियंत्रण और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही से स्थापित होता है।

आज का युग न्यूज़ का सवाल: क्या मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार पर वास्तव में अंकुश लगेगा, या हर बड़ी घटना के बाद कुछ दिनों की कार्रवाई और बैठकों के बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा? प्रदेश की जनता अब इस सवाल का जवाब चाहती है।

रिपोर्ट: आज का युग न्यूज़ | इंदौर–देवास, मध्यप्रदेश


इंदौर में अवैध शराब कारोबार पर आबकारी विभाग का बड़ा शिकंजा, 34 प्रकरण दर्ज; 320 लीटर मदिरा जब्त

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